हिंदू पंचांग · विक्रम संवत 2083
संपूर्ण सनातन कैलेंडर — सभी तिथियाँ, एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, त्योहार, प्रदोष व्रत और पावन अवसर, हिंदू पंचांग के अनुसार। दिव्य मार्गदर्शन के साथ अपनी उपासना, पूजा और व्रत की योजना बनाएँ।
पंचांग एक नज़र में
सनातन पंचांग
सभी तिथियाँ, त्योहार और पावन अवसर — हर दिन के महत्व और अनुशंसित पूजा के साथ।
धर्म ज्ञान
पंचांग एक पवित्र विज्ञान है — हर तिथि की अपनी ऊर्जा, देवता और उद्देश्य होता है।
अमावस्या की रात — सबसे अंधेरी रात, पितृ तर्पण (पूर्वजों के संस्कार) के लिए पावन। जीवित और दिवंगत के बीच की सीमा सबसे पतली होती है। शुभ कार्यों की शुरुआत से बचें; पितृ पूजन और आत्मचिंतन पर ध्यान दें।
पूर्णिमा की रात — सबसे समृद्ध तिथि। सत्यनारायण कथा, व्रत, नदी स्नान और भक्ति व दान के सभी कार्यों के लिए पावन। चंद्रमा की ऊर्जा चरम पर होती है, जिससे पूजा और ध्यान विशेष प्रभावशाली होते हैं।
ग्यारहवीं चंद्र तिथि — सनातन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण नियमित व्रत। माह में दो बार (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) मनाया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित। कहा जाता है कि एकादशी व्रत विशाल दान के समान पुण्य देता है।
दोनों पक्षों की तेरहवीं चंद्र तिथि (त्रयोदशी)। प्रदोष काल (सूर्यास्त से 1.5 घंटे पहले से 1.5 घंटे बाद तक) में भगवान शिव और पार्वती की पूजा। शिव कृपा का सबसे दुर्लभ और सीधा अवसर।
चौथी चंद्र तिथि — भगवान गणेश को समर्पित। विनायक चतुर्थी (शुक्ल) और संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण) हर माह मनाई जाती हैं। इन दिनों गणेश पूजा से बाधाएँ दूर होती हैं और समृद्धि आती है।
माँ दुर्गा की उपासना की नौ पावन रातें — वर्ष में दो बार (चैत्र और शारदीय) मनाई जाती हैं। नौ दिनों में से प्रत्येक नवदुर्गा के एक स्वरूप को समर्पित है। शक्ति उपासना और साधना का सबसे शक्तिशाली समय।
पूर्वजों को समर्पित 15 दिनों का पक्ष। तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किए जाते हैं। पूर्वजों का सम्मान उनका आशीर्वाद और मुक्ति लाता है — और हमारे अपने जीवन की बाधाएँ दूर करता है।
सूर्य का मकर राशि में संक्रमण उत्तरायण — सूर्य की शुभ उत्तर दिशा यात्रा — का आरंभ है। इस दिन किए गए सभी कार्य अपार पुण्य देते हैं। नदी स्नान, तिल अर्पण और पतंगबाज़ी पारंपरिक हैं।
॥ तिथिं शुभां विद्धि ॥
हर तिथि की एक अनूठी दिव्य ऊर्जा होती है। सही दिन चुनें, सही पूजा करें और ब्रह्मांडीय संयोग को अपने पक्ष में काम करने दें। हमारे पंडित तैयार हैं।