॥ काल: सर्वस्य कारणम् ॥
चैत्र से फाल्गुन तक प्रमुख व्रत और त्योहार, विक्रम संवत 2083 — अप्रैल 2026 से मार्च 2027।
वर्ष के प्रमुख त्योहार
चैत्र पूर्णिमा को मनाई जाने वाली भगवान हनुमान की जयंती — संकट मोचन चैरिटेबल सोसाइटी के नाम और स्थापना की भावना से जुड़ा एक विशेष दिन।
सूर्य का मेष राशि में प्रवेश, सौर नववर्ष का आरंभ — उत्तर भारत में फ़सल उत्सव के साथ बैसाखी के रूप में मनाया जाता है।
वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी — निर्जल उपवास। पुण्य में सभी 24 एकादशियों के बराबर। भगवान विष्णु को समर्पित।
इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं। चातुर्मास आरंभ — उच्च आध्यात्मिक साधना के चार पावन माह।
गुरु के सम्मान का सबसे पावन दिन — व्यास पूजा। महाराज जी विशेष आशीर्वाद देते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा का आरंभ है।
भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं — चातुर्मास का औपचारिक आरंभ। देवउठनी एकादशी तक विवाह और शुभ संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते।
पवित्र श्रावण माह आरंभ — हर सोमवार भगवान शिव को समर्पित। सोमवार को व्रत और रुद्राभिषेक से अपार आशीर्वाद मिलता है।
बहनों द्वारा भाइयों को बाँधा जाने वाला रक्षा का पवित्र सूत्र। नारली पूर्णिमा भी। यज्ञोपवीत बदलने वाले ब्राह्मणों के लिए उपाकर्म।
यह पंचांग सौर और चंद्र गणनाओं पर आधारित है और सामान्यतः उत्तर भारतीय (मिश्रित अमांत/पूर्णिमांत) तिथि परंपरा का पालन करता है। तिथियाँ स्थान, सूर्योदय/सूर्यास्त समय और पंचांग पद्धति के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। किसी भी व्रत, पूजा या मुहूर्त से पहले कृपया अपने स्थानीय पंडित या ज्योतिष आचार्य से सटीक तिथि और समय की पुष्टि करें। संकट मोचन चैरिटेबल सोसाइटी यह पंचांग धार्मिक एवं सामान्य जानकारी हेतु प्रस्तुत करती है।
इस कैलेंडर के किसी भी अवसर पर अपने घर, मंदिर या समुदाय में कथा, पूजा या सेवा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संकट मोचन परिवार से संपर्क करें।